जब पिया की याद आए तो क्या कीजे

बस आँखों से एक समंदऱ बहने दीजे

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समझने वाला गर कोई मिले तो उसे कुछ सम्झाउ
ये दुनिया नासमझो की इसमे किसे क्या सम्झाउ

बस इतना जान लो कि इंतेज़ार मे हैं किसी के
एक बार जीते जी मिल जाए, चैन से मर जाउ

की नही उसके बाद किसी और से गुफ्तगू हमने
हुनर तो बहुत है पर दिख्लाउ तो किसे दिख्लाउ

 

Ashwini Sharma

एक दीया

सैकड़ो दियों के बीच
एक दीया,
तेरे नाम का भी जलाया
रात भर लौ कांपती रही उस दिए की
खूब संभाला की बुझ ना पाए
और नही बुझने दिया
पर सुबह तक मेरा मकान
खाक हो गया
उसी दीए के जलने से

 

-Ashwini Sharma

untitled

एक नयी कहानी शुरू हुई
उसी जगह
जहाँ दफ़न की गयी थी
पुरानी कहानी, जिंदा
यूँ ही नही आते
ये जलजले ये तूफान
शायद वही दफ़न कहानी
तड़पती होगी तरसती होगी

 

Ashwini Sharma

मौसम

जो भी ताल्लुक था मिटा दिया गया
मज़ा-ए-गुफ्तगू तक भुला दिया गया

असमंजस मे तो इसलिए हैं अभी तक
जो कभी था ही नही कैसे चला गया

कौन निभाता है साथ मौत आने तक
वो आया और हवा की तरह चला गया

मैं अभी उसी बरसात मे भीग रहा हूँ
वो तो मौसम था बदलता चला गया

 

Ashwini Sharma

Dead

अंततः
मुझे ना खुशी होती है
ना किसी बात का गम होता है
ना ही कोई सपने है
ना कोई हक़ीकत
ना बारिश मे मज़ा आता है
ना ही धूप की चुभन
ना किसी का इंतेजर है
ना किसी से कोई ऐतबार
अब ना तो मैं रोता हूँ
ना ही हॅसा करता हूँ
ना किसी बात का मलाल करता हूँ
ना तो मैं तन्हा हूँ
ना ही किसी के साथ हूँ

जी हाँ मैं अब मर चुका हूँ,
और तुम ज़िंदाओ से मरा हुआ मैं बेहतर हूँ

 

Ashwini sharma

बारिश

आज रविवार, घर पे मन नही लग रहा था तो सोचा की ऑफीस चला जाता हूँ, थोड़ा काम कर लूँगा और मान लग जाएगा, ऑफीस मे लंच करके उठा ही था कि बारिश शुरू हो गयी, बारिश को देख कर कौन खुश नही होता, मैं भी खुशी खुशी बाहर भागकर आया, पर जैसे ही बारिश देखी दिल मे एक अजीब सी घबराहट सी उठी, ओर मैं अचानक से पुरानी यादो मे खो गया, पिछले साल की बारिश की यादो मे..

याद आया पिछली बार का वो टाइम जब बरसात हुई और मे खुशी से उसमे नहाने लगा, बारिश की बूंदे एसी लग रही थी जैसे वो मुझको प्यार से छू रही हो, जैसे की उसने मुझे ओढ़ लिया हो, नहाते नहाते भी मे उसी के बारे मे सोच रहा था की जैसे ही बारिश ख़त्म होगी उसे फोन करके बतौँगा की आज पहली बरसात हुई और मैं बहुत नाहया,बारिश रुकी मैं घर पे आया और सबसे पहले उसे मैसेज करके बारिश के बारे मे बताया, वो भी जैसे मेरा ही इंतेज़ार कर रही थी, क्यूकी बारिश होते वक़्त मे उससे बात नही कर पाया था, थोड़ी बैचन हो गयी थी की इतनी देर से मैं कहा था ना कोई कॉल ना कोई मैसेज, बारिश के बारे मे बताया तो उसने कहा की उसके शहर मे भी हुई थी बरसात, जब मैने कहा की मैं भीगा भी बहुत तो उसने मुझे डाँट दिया की बीमार पड़ जाओगे क्यू करते हो एसा, बड़ा अच्छा लगता था उससे डाँट खाना, फिर जैसे तेसे उसे मनाया और हम बाकी बातो मे व्यस्त हो गये.. उसके बाद जब बरसात होती थी तो वो मुझे बरसात की आवाज़ रेकॉर्ड करके भेजा करती थी, और मैं उसे, इतना पसंद था हमे बारिश का वो मौसम..

आज फिर से बारिश हो रही है, और वो मेरे साथ नही है, मान तो नही था पर खुद के एहसास के लिए फिर से भीगा बारिश मे, पर इस बार एसा नही लग रहा था जैसे की कोई मुझे छू रहा है, इस बारिश से तेज बारिश तो मेरे अंदर हो रही थी, आँसुओ की बारिश, भीगा हुआ था उनसे मैं, उसके वापिस आने के इंतेज़ार मे, उसकी यादो मैं, सोच रहा था की क्या उसके शहर मे भी बरसात हुई होगी, क्या उसे भी मेरी याद आई होगी, सोच रहा था की वो फिर से एक मैसेज भेज दे रेकॉर्ड करके जिसमे बारिश की आवाज़ सुनाई दे, और वो बताए की आज उसने पकोडे बनाए है, और मैं उसे बतौ की आज कितना भीगा, और फिर से उसकी डाँट खाऊ, पर वो तो नही आए लेकिन उसकी इन यादो ने मुझे भीगो दिया,

बारिश की बूँदो के साथ आँखो से भी बूंदे बहने लगी, और किसी को पता भी नही चला..

 

Ashwini sharma