सपना जो सच ना हो

एक सपना देखा था बहुत सालो पहले..

मुझसे कुछ गलती हो गई थी, और उसकी मुझे एसी सजा मिली कि सब मुझे बिना कुछ जाने बिना कुछ सोचे छोडकर चले गए.. एक बार भी नही सोचा कि मेरा क्या होगा, बस चले गए, शायद गलती ही इतनी बडी थी |

फिर क्या.. मैं तो टूट ही गया, और ऐसे हालात में एक ऐसी दुनिया में चला गया जो कि मुझे बिलकुल भी रास ना थी | पर करता भी क्या..

लेकिन अब जिस दुनिया में था वहाँ रहना बिलकुल पसंद नही था, बहुत ही बुरी दुनिया थी वो और वहाँ रहते रहते में भी बुरा बनता जा रहा था.. आना चाह रहा था वापिस पर नही आ पा रहा था.. बहुत कोशिश की पर फिर भी नही आ पाया.. जब खुद सी हार गया तो उसका ख्याल आया जो कि मुझे छोड तो गया था पर उसने मेरा साथ देने का वादा किया था..
सोच रहा था कि कहीं से वो आजाये, कैसै भी वो आजाये और मुझे यहाँ से बचा ले जाए.. आखिरकार मैं हूँ तो उसी का ही.. पर वो नहीं आया.. शायद भूल गया मुझे.. मेरी गलती ही शायद इतनी बडी थी..

और में वही रह गया जहाँ कभी रहना ना था.. तभी आँखें खुल गई और सपना टूट गया.. दिल को बडी तसल्ली हुई कि चलो अच्छा है, सपना ही था.. पर बुरा भी लगा कि सपने में भी ऐसा क्यूँ हुआ.. खेर !

लेकिन कुछ दिनों बाद फिर वही सपना आया, संयोग ही समझ लो..
और इस बार मैं उस दुनिया से वापिस अपनी दुनिया म आने में कामयाब रहा.. पर ये क्या, जब वापिस आया तो सभी ने मुझे पहचान ने से मना कर दिया.. सब पराया सा था.. उसने भी नहीं पहचाना जो हमेशा साथ रहता था और मेरी फिकर किया करता था |

मैं फिर से उसी दुनिया में लौट गया जहाँ में नहीं जाना चाहता था..

ये तो सिर्फ एक सपना था, लेकिन ये सपना अब सच होता लग रहा हैं.. हूबहू |

मैं अब वहाँ पहुँच रहा हूँ जहाँ नही जाना चाहता, आजाओ.. रोक लो मुझको कि कहीं देर ना हो जाए !!

 

Ashwini Sharma

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वो मेरी कलम

Power of Words

मुझे याद है बचपन का वो वक्त जब नया नया pen use करना आया था | बहुश शौक था मुइे pen का | पापा दिला के लाये थे Reynolds jetter. पसंद था मुझे jetter. हमेशा वही pen use करता था | फिर एक दिन मैने parker pen देखा | दिखने में बेहद खूबसूरत था | मुझे पसंद आने लगा, लेकिन बहोत महंगा था | पर उसे पाने इच्छा थी | लेकिन जब तक parker ले नही पाता तब तक jetter से ही काम चलाना पडेगा | वही jetter जो बहुत पसंद है..

Jetter जो कि मेरा favourite है, जो कि मेरा अपना है | फिर सोचा कि जाने दो Parker को अपना तो jetter ही है | हमेशा साथ रहेगा | हर बार साथ दिया है इसने इसे नही छोडूँगा |

एक दिन पापा मेरे लिए parker खरीद लाए | मै बहोत खुश हो गया | wow parker, यही तो मुझे चाहिए था |

उसी दिन ही मेरे jetter की ink खत्म हुई थी |

मैने कुछ नही सोचा और jetter को कचरे मे फेक दिया | बहुत खुश था मैं |

लेकिन आज इतने सालो बाद मुझे ये खयाल आया कि क्या हुआ होगा मेरे jetter का, क्या बीती होगी उस पर जब मैनै उसे फेक दिया, उसे बस मेरे हाथो से ही तो लगाव था, इतना साथ दिया उसने मेरा, कितना खुश रहता था वो जब मैं उसे उँगलियों पर घुमाता था, बेचारा, कैसै कर सकता हूँ मै एसा

आज याद आता है बहोत वही मेरा jetter, जिसने मेरा हमेशा साथ दिया | ढूँढता हूँ अब उसे पर कही खो गया है वो, अब शायद नही मिलेगा | मै तो फिर भी दूसरा pen use कर लेता हूँ, पर वो jetter कभी नही लिख पाएगा, वो अब कभी किसी की उँगलियो मे नही आएगा, कभी किसी कागज को नही छू पाएगा |

वो जिसे मैने फेक दिया था….

 

Ashwini Sharma

कहाँ हूँ मैं

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जो कहते थे कभी ना मिलना
वो रोज ख्वाबों में आते हैं

देखा नहीं जिसे एक जमाने से
तारे बनकर आँखों में समा जाते हैं

यूँ वादा करके वो हमसे मुकरे
कि सारे रास्तों पे हम ठोकर खाते हैं

इंतजार है उनके फिर लौट आने का
इस चाह में आँखे खोलकर सो जाते हैं

फिर वही सुबह होगी फिर वही सहर
जहाँ भी देखो खुद को अकेला पाते हैं

अजब हालात हैं इस तन्हाई के भी
उसे खोजते खोजते हम खुद से खो जाते हैं

 

Ashwini Sharma

वो ऩा मिला

A Dry Rose On Book

भटके यहाँ से वहाँ पर सुकून ना मिला
किश्ती के मुसाफिर को समन्दर ना मिला

है नही इश्क को पाना इतना आसान
जैसे बंजर हवेली में शोर ना मिला

कोई मुझसे इस तरह खो गया
जैसे पुरानी किताब में गुलाब ना मिला

हम भीड़ में भी ऐसे तन्हा हो गए
जैसे चाँद को तारो का सहारा ना मिला ||

Ashwini Sharma

आस लगा बैठे

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मालूम हैं हमे वो वापस नहीं आएँगे
अमावस की रात हम चाँद देखने बैठे

खुदा ने कहा कि वो तेरा कभी ना होगा
इस बात की हम खुदा से शर्त लगा बैठे

तमाम उम्र ये आँखे जलती रही इंतजार में
वो लौट आने का हमसे मजाक कर बैठे

यूँ तो सब कुछ मिला इस जिन्दगी में
जो कभी मिल ना सका उसकी आस लगा बैठे |

Ashwini Sharma