वो मेरी कलम

Power of Words

मुझे याद है बचपन का वो वक्त जब नया नया pen use करना आया था | बहुश शौक था मुइे pen का | पापा दिला के लाये थे Reynolds jetter. पसंद था मुझे jetter. हमेशा वही pen use करता था | फिर एक दिन मैने parker pen देखा | दिखने में बेहद खूबसूरत था | मुझे पसंद आने लगा, लेकिन बहोत महंगा था | पर उसे पाने इच्छा थी | लेकिन जब तक parker ले नही पाता तब तक jetter से ही काम चलाना पडेगा | वही jetter जो बहुत पसंद है..

Jetter जो कि मेरा favourite है, जो कि मेरा अपना है | फिर सोचा कि जाने दो Parker को अपना तो jetter ही है | हमेशा साथ रहेगा | हर बार साथ दिया है इसने इसे नही छोडूँगा |

एक दिन पापा मेरे लिए parker खरीद लाए | मै बहोत खुश हो गया | wow parker, यही तो मुझे चाहिए था |

उसी दिन ही मेरे jetter की ink खत्म हुई थी |

मैने कुछ नही सोचा और jetter को कचरे मे फेक दिया | बहुत खुश था मैं |

लेकिन आज इतने सालो बाद मुझे ये खयाल आया कि क्या हुआ होगा मेरे jetter का, क्या बीती होगी उस पर जब मैनै उसे फेक दिया, उसे बस मेरे हाथो से ही तो लगाव था, इतना साथ दिया उसने मेरा, कितना खुश रहता था वो जब मैं उसे उँगलियों पर घुमाता था, बेचारा, कैसै कर सकता हूँ मै एसा

आज याद आता है बहोत वही मेरा jetter, जिसने मेरा हमेशा साथ दिया | ढूँढता हूँ अब उसे पर कही खो गया है वो, अब शायद नही मिलेगा | मै तो फिर भी दूसरा pen use कर लेता हूँ, पर वो jetter कभी नही लिख पाएगा, वो अब कभी किसी की उँगलियो मे नही आएगा, कभी किसी कागज को नही छू पाएगा |

वो जिसे मैने फेक दिया था….

 

Ashwini Sharma

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2 thoughts on “वो मेरी कलम

  1. ये लिखने की शैली गज़ब की है… ऐसे ही लिखते रहिये
    इस ज़माने को ऐसे ही व्यंग्यपूर्ण लेखन की जरुरत है

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