तकदीर ही एसी रूठी

सारी उम्र जो शख्सियत सबको हँसाती रही है
आज आईने में खुद को यूँ ही रोते देख रही है

इन साँसो को न कोई समझ पाया ना समझ पाएगा
ना ठीक से चल पा रही है ना ही रुक पा रही है

यूँ तो हमने पूरी शिद्दत से मोहब्बत की है उनसे
पर ये तकदीर ही एसी रूठी है जो मान नही रही है

 

Ashwini Sharma

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