आदमी खिलोना है

जब भी मेले मे जाता था तो खिलोनो की कई सारी दुकाने देख कर बहुत खुश होता था, ज़िद करता था घरवालो से खिलोने लेने की, और कई बार ज़िद मे कामयाब भी रहता था, खिलोनो को ज़्यादा समझता तो नही था पर जो दिखने मे अच्छा लगता था उसे ही लेने का मान करता था, किसे पसंद नही होते खिलोने सभी को पसंद होते है,

खिलोना लेकर जब घर आता तो सीधे अपने दोस्तो के पास पहुच जाता और उन्हे खिलोना दिखा कर चिढ़हया करता था, लेकिन खिलोनो की खास बात कहे या हमारे मन की, एक ही खिलोना ज़्यादा दीनो तक खुश नही रख पाता, खिलोना तो वही रहता है पर हमारा ये मन ये बदलता रहता है, इसे हर बार कुछ नया मिलता है, मैं भी अपने खिलोने से उब गया था, अब वो खिलोना जिसे मे बड़े चाव से लेकर आया था अब मुझे अच्छा नही लग रहा था,

कुछ दिनो बाद फिर से मेला लगा, और हम फिर से पहुच गये खिलोने की दुकान पे, इस बार ओर अच्छा खिलोना दिखा, उसे लेने की ज़िद की और ले ही आए, अब घर आते ही सबसे पहले पुराने वेल खिलोने को तोड़ के स्टोर रूम मे फेक दिया, ओर नया वाला खिलोना लेकर खुश होता रहा.. वही कुछ दिनो की खुशी, और वो पहले वाला खिलोना दफ़न हो गया जिसने मुझे कुछ दिनो की खुशी दी थी, फिर कभी याद भी नही किया उसे,

मेरी ज़िंदगी भी उस खिलोने की तरह है,

इस कहानी मे वो खिलोना मैं हूँ, ओर उस खिलोने का खरीददार वो है जिसे मेने कुछ वक़्त खुश रखा, मैं अब उसे खुश नही कर पा रहा था, पर मैं तो वही था, बदला भी नही, लेकिन उसका मन बदल गया, और अब वो खरीददार फिर से मेले मे चला गया है, नये खिलोने की तलाश मे, और मैं उसके वापिस लौट आने का इंतेज़ार कर रहा हूँ की कब वो आएगा और मुझे स्टोर रूम मे दफ़न कर जाएगा..

 

Ashwini sharma

 

 

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