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समझने वाला गर कोई मिले तो उसे कुछ सम्झाउ
ये दुनिया नासमझो की इसमे किसे क्या सम्झाउ

बस इतना जान लो कि इंतेज़ार मे हैं किसी के
एक बार जीते जी मिल जाए, चैन से मर जाउ

की नही उसके बाद किसी और से गुफ्तगू हमने
हुनर तो बहुत है पर दिख्लाउ तो किसे दिख्लाउ

 

Ashwini Sharma

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एक दीया

सैकड़ो दियों के बीच
एक दीया,
तेरे नाम का भी जलाया
रात भर लौ कांपती रही उस दिए की
खूब संभाला की बुझ ना पाए
और नही बुझने दिया
पर सुबह तक मेरा मकान
खाक हो गया
उसी दीए के जलने से

 

-Ashwini Sharma