To be or not to be

ना तुम मुस्कुराते ना ये बात होती
उस चाँदनी रात यूँ आँखे चार ना होती

छत तो टिकी रहती है दीवारो के सहारे
चार दीवारो के बीच ये तन्हाई ना होती

ना तुम टूटते ना हम टूटकर चाहते
अगर तेरे मेरे दिल की दोस्ती ना होती

दिल भी साफ रहता बगैर नफ़रत के
गर मुझसे प्यार की अगुवाई ना होती

मैं भी किसी से गिला शिकवा कर पाता
जो मुझमे तुझे पाने की चाहत ना होती

ना तुम मुस्कुराते ना ये बात होती

 

Ashwini Sharma

वही हूँ

मैं इश्क के गम का मारा बन्दा हूँ
आज मदिरालय में आके बैठा हूँ..

यूँ तो कभी खोने को कुछ था नही
आज सब कुछ खो के बैठा हूँ..

कुछ सपने सजाए थे उसके साथ
आज उनको समेटने बैठा हूँ..

वो तो कभी वापिस आ न पाए
मौत के इन्तजार में हाथ फैलाए बैठा हूँ

 

Ashwini Sharma

तकदीर ही एसी रूठी

सारी उम्र जो शख्सियत सबको हँसाती रही है
आज आईने में खुद को यूँ ही रोते देख रही है

इन साँसो को न कोई समझ पाया ना समझ पाएगा
ना ठीक से चल पा रही है ना ही रुक पा रही है

यूँ तो हमने पूरी शिद्दत से मोहब्बत की है उनसे
पर ये तकदीर ही एसी रूठी है जो मान नही रही है

 

Ashwini Sharma

एक मेरा दिल है

आज फिर से कुछ लिख जाने का दिल है
किसी कहानी को एक गजल देने का दिल है

यूँ तो इस भीड का ही हिस्सा हूँ लेकिन
तेरे याद में तन्हा हो जाने को दिल है

दुनिया को तो में कब का छोड आया था
आज फिर से फना हो जाने का दिल है

तुझे भी उसी खुदा ने बनाया मुझे भी
ये खुशनुमा तेरा दिल है ये बंजर मेरा दिल है

 

Ashwini Sharma

तेरी फिकर

मैं खुदा को तो नही माना करता हूँ
पर तेरी दिल से इबादत करता हूँ

दिल में नफरत है बहोत जमाने के लिए
तुझे दिल-ओ-जान से मोहब्बत करता हूँ

हाथों में किस्मत की लकीर नही रही
पर तेरा इंतजार तो अब भी करता हूँ

मुझे नही मालूम तुम किस हाल में होंगे
लेकिन अब भी फिकर तो तेरी करता हूँ

 

Ashwini Sharma

सपना जो सच ना हो

एक सपना देखा था बहुत सालो पहले..

मुझसे कुछ गलती हो गई थी, और उसकी मुझे एसी सजा मिली कि सब मुझे बिना कुछ जाने बिना कुछ सोचे छोडकर चले गए.. एक बार भी नही सोचा कि मेरा क्या होगा, बस चले गए, शायद गलती ही इतनी बडी थी |

फिर क्या.. मैं तो टूट ही गया, और ऐसे हालात में एक ऐसी दुनिया में चला गया जो कि मुझे बिलकुल भी रास ना थी | पर करता भी क्या..

लेकिन अब जिस दुनिया में था वहाँ रहना बिलकुल पसंद नही था, बहुत ही बुरी दुनिया थी वो और वहाँ रहते रहते में भी बुरा बनता जा रहा था.. आना चाह रहा था वापिस पर नही आ पा रहा था.. बहुत कोशिश की पर फिर भी नही आ पाया.. जब खुद सी हार गया तो उसका ख्याल आया जो कि मुझे छोड तो गया था पर उसने मेरा साथ देने का वादा किया था..
सोच रहा था कि कहीं से वो आजाये, कैसै भी वो आजाये और मुझे यहाँ से बचा ले जाए.. आखिरकार मैं हूँ तो उसी का ही.. पर वो नहीं आया.. शायद भूल गया मुझे.. मेरी गलती ही शायद इतनी बडी थी..

और में वही रह गया जहाँ कभी रहना ना था.. तभी आँखें खुल गई और सपना टूट गया.. दिल को बडी तसल्ली हुई कि चलो अच्छा है, सपना ही था.. पर बुरा भी लगा कि सपने में भी ऐसा क्यूँ हुआ.. खेर !

लेकिन कुछ दिनों बाद फिर वही सपना आया, संयोग ही समझ लो..
और इस बार मैं उस दुनिया से वापिस अपनी दुनिया म आने में कामयाब रहा.. पर ये क्या, जब वापिस आया तो सभी ने मुझे पहचान ने से मना कर दिया.. सब पराया सा था.. उसने भी नहीं पहचाना जो हमेशा साथ रहता था और मेरी फिकर किया करता था |

मैं फिर से उसी दुनिया में लौट गया जहाँ में नहीं जाना चाहता था..

ये तो सिर्फ एक सपना था, लेकिन ये सपना अब सच होता लग रहा हैं.. हूबहू |

मैं अब वहाँ पहुँच रहा हूँ जहाँ नही जाना चाहता, आजाओ.. रोक लो मुझको कि कहीं देर ना हो जाए !!

 

Ashwini Sharma